मानव अभ्यास दर्शन

मानव में स्थूल, सूक्ष्म एवं कारण भेद से क्रियाशीलता प्रसिद्ध है।

Page 161

मध्यस्थ दर्शन (अस्तित्व मूलक मानव केन्द्रित चिंतन)/161

होती है और न सामाजिकता ही सिद्ध होती है।

विशेषतः मानव के साथ प्रतिक्रिया अपराध के बिना नहीं होती है। अमानवीयतावादी जीवन में किया गया संघर्ष ही प्रतिक्रियावादी जीवन है। अमानवीयता ही संघर्ष का प्रधान कारण है। अमानवीयता की सीमा में अभ्युदय संभव नहीं है। अभ्युदय विहीन जीवन मानवीयता पूर्ण होना संभव नहीं है। अभ्युदय के लिए मानवीयता (चेतना विकास मूल्य शिक्षा कार्यक्रम ही) एकमात्र आधार है। अपराध एवं प्रतिक्रियात्मक जीवन स्वस्थ एवं सफल नहीं है। इसे सफल बनाने के लिए प्रत्येक मानव में वांछा पायी जाती है। इसी तथ्य वश मानव मानवीयता से परिपूर्ण होने के लिए बाध्य है।

50.

मानव में स्थूल, सूक्ष्म व कारण भेद से क्रियाशीलता प्रसिद्ध है।

इन्द्रिय व्यापार एवं उत्पादन स्थूल क्रियाएं हैं। मन, वृत्ति, चित्त एवं बुद्धि की क्रियाशीलता एवं मूल्यानुभूति सूक्ष्म क्रियाएं हैं। स्थूल क्रियाएं सूक्ष्म क्रिया से अनुप्राणित एवं नियंत्रित है। उत्पादन से समृद्धि, व्यवहार से सहअस्तित्व, विचार में समाधान एवं सत्य में अनुभूति चरितार्थ होना ही कारण क्रिया है। इसी चरितार्थता के लिए ही सम्पूर्ण प्रकार के अभ्यास हैं। चरितार्थता के अतिरिक्त अर्थात् इसके विपरीत जो कुछ भी क्रियाकलाप हैं वे सब अव्यवहारिक, अमानवीयता की सीमा में गण्य है। स्थूल क्रियाओं का नियंत्रण एवं सूक्ष्म क्रियाओं में परिमार्जन एवं पूर्णता प्रसिद्ध है। चैतन्य जीवन में ही सूक्ष्म जीवन गण्य है। मन, वृत्ति एवं चित्त ही सूक्ष्म क्रिया है। बुद्धि एवं आत्मा कारण क्रिया है। चैतन्य जीवन सूक्ष्म एवं कारण क्रिया का सम्मिलित रूप है। अनुभव में पराभव नहीं है। उत्पादन एवं व्यवहार में ही विभव एवं पराभव का परिचय होता है। व्यवहार एवं व्यवसाय में असफलता विचार व अनुभूति पूर्णता का लक्षण नहीं है। विचार पूर्णता केवल निपुणता, कुशलता एवं पाण्डित्य ही है। विचार पूर्णता के लिए ही शिक्षा है जिसका स्थूल रूप ही उत्पादन एवं व्यवहार है। सत्य और सत्यता की ही अनुभूति होती है।

“उदय सहित उपलब्धियाँ होती है।” अनुभव से अधिक उदय होना प्रसिद्ध है। प्रत्येक उदय अनुमान क्रिया के लिए विशालता है। यही उदय जो अनुमानपूर्वक सन्निहित होता है इसके पूर्व में वह आगम क्रिया थी ही। यह क्रम जीवन जागृति पर्यन्त होता है उसके (उदय अनुमान क्रिया) पूर्व अथवा अप्राप्ति एवं अज्ञान रहता है। जीवन संबंधी भ्रम व रहस्य एवं