मध्यस्थ दर्शन (अस्तित्व मूलक मानव केन्द्रित चिंतन)/173
परिशिष्ट
अनुभव समुच्चय : ब्रह्मानुभूति में परमानन्द, आत्मानुभूति में आनन्द, बुद्धि की अनुभूति में संतोष, चित्त की अनुभूति में शांति, वृत्ति की अनुभूति में सुख
मूल्य समुच्चय : जीवन मूल्य, मानव मूल्य, स्थापित मूल्य, शिष्ट मूल्य, वस्तु मूल्य
चतुष्टय
अवस्था चतुष्टय : पदार्थावस्था, प्राणावस्था, जीवावस्था, ज्ञानावस्था
आयाम चतुष्टय : उत्पादन, व्यवहार, विचार, अनुभव
भय चतुष्टय : प्राणभय, पद भय, धन भय, मान भय
विषय चतुष्टय : आहार, निद्रा, भय, मैथुन
चतुर्दिंग उदय : संस्कृति, सभ्यता, विधि, व्यवस्था
जीवन लक्ष्य : सुख, शांति, संतोष, आनन्द
मानव लक्ष्य : समाधान समृद्धि अभय सहअस्तित्व
त्रय
ऐषणा त्रय : पुत्रेषणा, वित्तेषणा, लोकेषणा
कार्यक्रम त्रय : आर्थिक कार्यक्रम, सुरक्षात्मक कार्यक्रम, सदुपयोगात्मक कार्यक्रम
क्रिया त्रय : भौतिक क्रिया, बौद्धिक (जीवन) क्रिया, रासायनिक क्रिया
चक्र त्रय : प्राण पद चक्र, भ्रांति पद चक्र, देव पद चक्र
तथ्य त्रय : परिणाम, निर्णय प्रक्रिया के कारण, गुण, गणित ही आद्यान्त आधार है। यही निर्णायक तथ्य त्रय है।
तात्रय : मानवीयता, देव मानवीयता, दिव्य मानवीयता
नियम त्रय : सामाजिक नियम, प्राकृतिक नियम, बौद्धिक नियम
नीति त्रय : धर्म नीति, अर्थ नीति, राज्य नीति
प्रतिष्ठा त्रय : अनुभव में परमानन्द प्रतिष्ठा, विचार में समाधान प्रतिष्ठा, व्यवहार में प्रेम प्रतिष्ठा