मानव अनुभव दर्शन

अध्याय - छः

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अध्याय - छः

ब्रह्मानुभूति सम्पन्न मानव ही जड़ प्रकृति की आसक्ति से मुक्त है जिसका जीवन भ्रम मुक्त अवस्था में है ।