मानव अनुभव दर्शन

अध्याय - सात

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अध्याय - सात

ज्ञानावस्था में सभी मानव का आद्यन्त ईष्ट ब्रह्मानुभूति ही है । अतएव मानव द्वारा मात्र उसी के अनुकूल उत्पादन, व्यवहार, विचार, विधि-व्यवस्था, अध्ययन, शिक्षा प्रणाली, विनिमय और उपयोग प्रणाली का प्रणयन एवं उन्नयन तथा पालन अनुसरण ही सर्व मंगलमय कार्यक्रम है ।