मानव अनुभव दर्शन

अध्याय - तीन

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अध्याय - तीन

श्रम का क्षोभ ही विश्राम की तृषा है। ब्रह्मानुभूति ही पूर्ण विश्राम है।

प्रत्येक कर्म के स्फुरण के मूल में संस्कार है प्रत्येक कर्म संस्कारदायी है।