मानव अनुभव दर्शन

अध्याय - पाँच

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अध्याय - पाँच

जिस मानव के उत्पादन का अधिकांश भाग अखण्ड समाज सार्वभौम व्यवस्था में और न्यून अंश परिवार में उपयोग- सदुपयोग के निमित्त प्रयुक्त होता है वही श्रेष्ठ मानव है । वही ब्रह्मानुभूति क्षमता को पाने का अधिकारी है ।