मानव कर्म दर्शन

परावर्तन-प्रत्यावर्तन

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दिया। आकाश गंगा भी अनेक होना पाया जाता है। ये सभी परस्परता में अच्छी दूरी में रहते हुए बड़ी व्यवस्था को बनाये रखने में भागीदारी करते हैं।

12. परावर्तन-प्रत्यावर्तन

स्थिति-गति, बल-शक्ति के मुद्दे पर छोटे से छोटे, बड़े से बड़े इकाइयों के साथ, वह भी सभी पद और अवस्था में स्पष्ट हो चुकी है। अब परावर्तन-प्रत्यावर्तन संबंधी ज्ञान, विचार, निर्णय, प्रमाण, फल, परिणाम, ज्ञान का गवाही होने पर ध्यान देते हैं। गम्यस्थली के अर्थ में ही मानव सारे कार्य कलाप संपन्न करना चाहता है। जैसे मानव चलने लगता है, उसकी गम्यस्थली उसके सामने होना आवश्यक है। गम्यस्थली न हो, चलना ही हो, ऐसे मानव को हम क्या कहेंगे, हर मानव सोच सकता है। इसी प्रकार एक चींटी भी, एक हाथी भी, पशु पक्षी भी, जीव जन्तु भी, जितने भी चलायमान है, उनके गम्यस्थली उन-उन के साथ जुड़ा ही रहता है। इसका प्रमाण यही है कि सभी चल कर कोई निश्चित जगह पर पहुँचते रहते हैं। जल में तैरने वाले मगरमच्छ भी तैरते हुए निश्चित, निर्धारित जगह पर होते हैं। इस तरह से कुछ वस्तु धरती के हर स्थल पर होने वाले होते हैं। कुछ कहीं कहीं होने वाले होते हैं। कुछ अत्यल्प जगह में होने वाले होते हैं। जैसे हवा धरती के सभी ओर रहता है, सूर्य का प्रकाश एक ओर रहता है, एक ओर नहीं रहता है, जैसे नदी दूर-दूर तक बहती है, जैसे पहाड़ एक ही जगह में दिखाई पड़ता है। जैसा झाड़-पौधे एक ही जगह में रहते हैं। इसी धरती में मानव भी रहता है पक्षी भी रहता है। कुछ वर्ष पहले मानव ऐसा सोचता था कि पक्षियाँ ही दूर-दूर जाते हैं वह बदलकर अब मानव भी पूरी धरती में घूमता है। घूमते हुए भी कोई न कोई जगह में, स्थान में होता ही है। होना एक अवश्यंभावी रहता ही है। यह स्थिति-गति के साथ जुड़ी हुई तथ्य है। स्थिति के बिना गति होती नहीं। यह सिद्धान्त अथवा सकारात्मक स्थिति के साथ ही गति प्रमाणित होता है। मानव की स्थिति गति सुस्पष्ट है। एक जगह से दूसरी जगह जाते हुए मानव का होना भी, स्थानांतरण होना भी दिखाई पड़ता है। इसके साथ-साथ परावर्तन-प्रत्यावर्तन क्रिया भी संपादित होती रहती है।

ऐसे परावर्तन-प्रत्यावर्तन को हम पहचानने, पहचानवाने के रूप में समझने, समझने के रूप में सीखने, सीखने के रूप में हम अपने में होना पाते हैं। इसमें से समझने समझाने का जो भाग है, इसी में परावर्तन प्रत्यावर्तन सुस्पष्ट होता है। प्रत्यावर्तन विधि से समझते है, समझाने की विधि