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विवेक अर्थात् मानव लक्ष्य और जीवन मूल्य अर्थात् समाधान समृद्धि ही उपासना का प्रत्यक्ष फल है जिसमें सामाजिकता स्वाभाविक रूप से समाहित रहती है ।Books
All Books →- जीवन विद्या एक परिचय110 pages

- विकल्प एवं अध्ययन बिंदु60 pages

- मानव कर्म दर्शन178 pages

- मानव अभ्यास दर्शन195 pages

- मानव अनुभव दर्शन67 pages

- व्यवहारात्मक जनवाद152 pages

- समाधानात्मक भौतिकवाद232 pages

- अनुभवात्मक अध्यात्मवाद164 pages

- व्यवहारवादी समाजशास्त्र192 pages

- आवर्तनशील अर्थशास्त्र164 pages

- मानव संचेतनवादी मनोविज्ञान268 pages

Shorts
- 1:0908 06 301 GT Samagrata Mein Darshan Hota Hai, समग्रता में दर्शन होता है
- 2:2108 06 308 FT Understandiing Widened, समझ व्यापक हुई
- 1:1008 06 113 MA Dhairya Explained, धैर्य की व्याख्या
- 2:4708 06 700 GT Samadhan, Samridhi, Sanskriti, Sabhyata, समाधान, समृद्धि, संस्कृति, सभ्यता
- 1:2608 10 75 AD Akarshan, Vikarshan, Sunyakarshan, आकर्षण, विकर्षण, शुन्याकर्षण
- 1:4308 10 68 AP Pratidin Parisheelan, Mulyankan, प्रतिदिन परिशीलन, मूल्याङ्कन
- 1:2808 10 67 AD Prachar, Apradh, Shram, Yantr, Parivar, प्रचार, अपराध, श्रम, यंत्र, परिवार 1
- 2:2108 10 66 AD Pratibimb, Roop, Gun, Svabhav, Dharm, प्रतिबिम्ब, रूप, गुण, स्वभाव, धर्म
- 1:3108 10 70 AP Asharir Jeevan Se Prerana, अशरीर जीवन से प्रेरणा
- 1:2708 10 56 AP Adhyayan, Dhyan Dena, Mun, Vichar, Iccha, अध्ययन, ध्यान देना, मन, विचार, इच्छा
- 2:5008 10 44 AP Daya, Kripa, Karuna, Prem, दया, कृपा, करुणा, प्रेम
- 2:3708 10 41 AD Kiran, Vikiran, Bhukhe, Ajeern Parmanu, किरण, विकिरण, भूखे, अजीर्ण परमाणु
